Wednesday, 13 February 2019

सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक
              ★ सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण★

         *पाचन तंत्र की मजबूती के लिएे*
पेनक्रियाज (अग्नाशय) पाचन तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो पेट के पीछे और छोटी आंत के पास में पाई जाती है।
 
पेनक्रियाज कमजोर होने पर सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण कारगर साबित होता है।
           *भूख न लगे तो यह चुर्ण रामबाण है*
             * पित्त वायु के लिए रामबाण*
             *अपेंडिक्स में रामबाण है*
*छाती और गले के छाल,मुंह छालेऔर जलन में फायदेमंद*
               *सिद्ध संतों की एक खोज*
*एक बार उपयोग करेगे तो बार बार मंगवागे*
             *सिद्ध पचन कल्पचुर्ण*
      *इंद्रायाण(कोड़तुम्बा) अजवाइन और*
         *गिलोय रस में तैयार होता है*
         *सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण चुर्ण*
        *पेट दर्द में कारगर है कल्पचुर्ण*
         *अपेंडिक्स में रामबाण है*
मानसिक तनाव, चिंता, भय, अवसाद, असंतुलित खान पान आदि आपके पाचन को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं|
गिलोय में digestive और stress दूर करने वाले गुण होते हैं जो की बदहजमी, कब्ज, गैस, मरोड़ आदि समस्याओं को दूर करता है और आपके पाचन को बेहतर बनाता है
      *यह गैस और कब्ज के लिये सर्वश्रेष्ठ दवा है।*
         *यह पेट के समस्त रोगों में लाभदायक है।*
   *सिद्ध  पाचन चूर्ण एक बेहतरीन दस्तावर औषधि है* |
    सभी रोग पेट के साफ न होने के कारण ही होते है
पेट साफ नही होगा बीमारी शरीर को जकड़ लेती हैं।
आयुर्वेद में कहा भी गया है कि स्वस्थ रहने का रास्ता पेट से होकर जाता है |
सिद्ध पाचक चूर्ण गैस्ट्रिक एवं कब्ज की समस्या में रामबाण औषधी साबित होती है |
आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में गैस्ट्रिक और कब्ज एक आम समस्या हो गई है जो हर घर में देखने को मिलती है |
सिद्ध पाचन चुर्ण आप को औऱ आपके  परिवार को रोग से मुक्ति दिलवा सकता है।
रोज या दूसरे दिन रात आधा चम्मच जरूर ले। आप कभी बीमार नही होंगे।
गैस बन गई हैं तो एक चुटकी मात्र चूसे 1 मिनट में जलन गैस समाप्त हो जाती है।
       सिद्ध पाचन चूर्ण बनाने की विधि
     सिद्ध  पाचन चूर्ण बनाने के लिए हमें –
त्रिफला                ~2 kg
बेल चुर्ण               ~ 1kg
ब्रह्मी बूटी              ~ 500 ग्राम
संखपुष्पी               ~200 ग्राम
हिंग                      ~  100 ग्राम
कालीमिर्च             ~  200 ग्राम
अजवायन             ~  400 ग्राम
दालचीनी             ~ 200 ग्राम
छोटी हरेड             ~  200 ग्राम
शुद्ध सज्जीखार     ~  100 ग्राम
सैंधा नमक            ~   50 ग्राम
नसादर                      100 ग्राम
काला नमक।                50 ग्राम
सौंफ भुनी             ~  100 ग्राम
पिपली छोटी              100 ग्राम
सोंठ                         100 ग्राम
पुदीना सत             ~    10ग्राम
निम्बू सत               ~   10 ग्राम 
मीठा सोडा             ~300 ग्राम
1लीटर गिलोय रस में भावना जरूर दे।
तभी यह पेट की हर इंफेसन को दूर करेगी।
अगर निम्बू औऱ पुदीना सत न मिले तो 20 ग्राम निम्बू रस में सभी चुर्ण को मिलाकर सायं में सुखाए।
इनको अच्छी तरह कूट – पीसकर और कपडछान कर के साफ़ एवं (Air Tight ) मजबूत डक्कन वाली शीशी में भर लेवे ,
  ★ यह गैस्ट्रिक और कब्ज की रामबाण औषधि है ★
मात्रा और सेवन विधि
पानी के साथ सेवन करे
सिद्ध पाचन चूर्ण को आधा चम्मच की मात्रा में रोज सुबह शाम सेवन करे |
बच्चों को कब्ज की या पेट दर्द की शकायत में चमच्च का 1/4 भाग गर्म पानी से दे।
1 से 6 महीने के बच्चों को एक चुटकी चटाएं।
लाभ
यह चूर्ण वायु तथा वात के सभी प्रकार के रोगों को दूर करता है |
इसके सेवन से पेट की अग्नि ठीक होती है |
अपान वायु बहार निकल जाती है ,
कब्ज को भी जड़ से दूर करने में सक्षम है |
यह चूर्ण बच्चो में भी लाभ कारी है |
★★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
आहार में रेशेदार फल और सब्जियाँ जैसे सेब, संतरे, ब्रोकोली, बेरियाँ, नाशपाती, मटर, अंजीर, गाजर और फलियाँ आदि शामिल करें।
साबुत अनाज जैसे भूरे चावल, ज्वार, बाजरा, मेवे, गिरियाँ, और मछली, दालें, मसूर दाल, चावल और सोया के उत्पादों का प्रयोग बढ़ाएँ।
पानी मिला फलों का रस, प्राकृतिक पदार्थों से उत्पन्न सब्जियाँ, और औषधीय चाय पियें।
बीज सहित अमरुद और बेल का फल आँतों को व्यवस्थित करता है, और आहार में रेशे की मात्रा बढ़ाता है, ताकि कब्ज से राहत मिल सके। फल जैसे कि केले, आलूबुखारे, अंगूर और पपीता भी इसमें सहायक होते हैं।
★★★
इनसे परहेज करे
अधिक शक्कर उत्सर्जित करने वाले आहार जैसे रिफाइंड अनाज, शक्कर की गोलियाँ, केक और बिस्कुट आदि से परहेज।
रेड मीट, डेरी आहार, और अंडे।
कॉफ़ी, चाय और शक्करयुक्त कार्बन वाले पेय।
Online मंगवा सकते हैं।
सिद्ध अयूर्वादिक
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