Saturday, 16 March 2019

पीलिया रोग की अयूर्वादिक दवा



        
       *पीलिया रोग की अयूर्वादिक दवा*


        *सिद्ध पीलिया नाशक कल्पचुर्ण*



*94178 62263 whats करे online मगवाएँ*

*खून की कमी औऱ अशुद्धि को करे 10 दिन में पूरा*

*पीलिया के प्रकार*
*पीलिया मुख्यत तीन प्रकार का होता है*
*जोकि इस प्रकार हैं – वायरल हैपेटाइटिस ए, वायरल हैपेटाइटिस बी तथा वायरल हैपेटाइटिस नान A व नान B।*
*यह दवा सभी प्रकार के पीलिया रोग में कारगर है*
       *(Online दवा मंगवा सकते हैं)*
*पीलिया नाशक कल्पचुर्ण नुस्ख़ा*
गिलोय 100 ग्राम
कलमी शोरा 50 ग्राम
आँवला 50 ग्राम
सोंठ 50 ग्राम
काली मिर्च 50 ग्रान
पीपर (पाखर) 30 ग्राम
हल्दी  30 ग्राम
मीठा सोडा 30 ग्रान
उत्तम लोहभस्म 50 ग्राम
मिश्री तांगा  100 ग्राम
*सभी को मिलाकर  200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।*
*दो आनी भार *(करीब 1.5 ग्राम आधा चम्मच)*जितना चूर्ण दिन में तीन बार शहद के साथ लेने से पीलिया का उग्र हमला भी 3 से 7 दिन में शांत हो जाता है।*
★★★
*परहेज और आहार*
*लेने योग्य आहार*
*सब्जियों का ताजा निकला रस (चुकंदर, मूली, गाजर, और पालक), फलों का रस (संतरा, नाशपाती, अंगूर और नीबू) और सब्जियों का शोरबा।*
ताजे फल, जैसे सेब, अन्नानास, अंगूर, नाशपाती, संतरे, केले, पपीता, आदि। खासकर अन्नानास विशेष रूप से उपयोगी होता है।
पीलिया के उपचार हेतु जौ का पानी, नारियल का पानी अत्यंत प्रभावी होते हैं।
*नीबू के रस के साथ अधिक मात्रा में पानी पीने से लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की रक्षा होती है।
पीलिया की चिकित्सा हेतु लिए जाने वाले प्रभावी आहारों में फलों के रस का विशेष स्थान है। गन्ने, नीबू, मूली, टमाटर आदि का रस लिवर के लिए अत्यंत सहायक होता है।*
*आँवला भी विटामिन सी का उत्तम स्रोत है। आप अपने लिवर की कोशिकाओं को स्वच्छ करने हेतु कच्चा, धूप में सुखाया हुआ या रस के रूप में आँवला ले सकते हैं।*
अनाज जैसे ब्रेड, चपाती, सूजी, जई का आटा, गेहूँ का दलिया, चावल आदि कार्बोहायड्रेट के बढ़िया स्रोत हैं और पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को दिये जा सकते हैं।
●●●
*इनसे परहेज करें*
तले और वसायुक्त आहार, अत्यधिक मक्खन और सफाईयुक्त मक्खन, माँस, चाय, कॉफ़ी, अचार, मसाले और दालें आदि
सभी वसा जैसे घी, क्रीम और तेल।
★★★
कुछ अचूक नुस्खे जिससे आपको पीलिया के इलाज में मदद मिलेगी ।
*गन्ने का रस*
गन्ने का रस दिन में कई बार पीना चाहिये। पीलिया के रोग में यह अमृत है। गन्ने के रस का सेवन करने से पीलिया बहुत ही जल्दी ठीक हो जाता है।
*छाछ*
पीलिया के रोग में 1 ग्लास छाछ रोज़ाना पीनी चाहिये। इसमें काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से इसका गुण और भी बढ़ जाता है और यह कुछ ही दिनों में पीलिया के रोग को समाप्त कर देता है।
*प्याज़ से इलाज*
प्याज़ पीलिया में बहुत ही लाभदायक होती है। प्याज़ को काट लीजिये और नीबू के रस में कुछ घंटों के लिये भिगो दीजिये। कुछ घंटों बाद इस प्याज़ को निकाल लीजिये। इसे नमक और काली मिर्च लगाकर मरीज को खिला दीजिए। दिन में 2 बार इस प्याज़ को खाने से पीलिया बहुत ही जल्दी दूर हो जाता है।
*फ्रूट्स*
फलों में तरबूज और खरबूजा दोनों ही पीलिया में बहुत लाभदायक हैं। इन्हें अच्छी मात्रा में खाना चाहिये। इससे पीलिया का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
*निम्बू का रस*
लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पिएं। कुछ ही दिनों में आप खुदको पीलिया से छुटकारा मिलता है महसूस करेंगे।
*मूली के पत्ते*
मूली के हरे पत्ते पीलिया के इलाज में बेहद लाभदायक होता है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी। और आप पाएंगे पीलिया से छुटकारा।
*टमाटर का रस*
टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें।
*खास एहतियात बरतें*
स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो किलोमीटर घूमने जाएं और कुछ समय धूप में रहें। भोजन में उन चीजों को शामिल करें  जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी भोजन के मामले में लापरवाही न बरतें। वर्कआउट खूब करें और स्वच्छता से रहें हेल्दी चीजें खाएं।
*पीलिया में इनका सेवन न करें*
सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थोड़ी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं।
*दाल खाने से बचें,  क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है।*
     ■हम आप की सेवा में है■
         ◆ किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए◆
          ●निशुल्क सिद्घ अयूर्वादिक सलाह ले●
                 Whats 94178 62263


सर्दी नाशक कल्पचुर्ण

 




       जिदी जुकाम ,कफ़ खाँसी और
           बुखार की रामबाण दवा
          *सर्दी नाशक कल्पचुर्ण*



     *सर्दी की करे छूटी 10मिनटों में*
*घर रखें सदा डॉक्टर के पास जाने की 
         नही होगी जरूरत*।

ऑनलाइन मगवाएँ whats 94178 62263

नुस्खा -सिद्ध सर्दी नाशक कल्पचुर्ण

गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
हींग -20 ग्राम(भूनी हुई)
शिलाजीत -20ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम
सौंठ-20 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम
सभी  चूर्ण को मिलाकर रख ले ।
दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे ।
3 दिन पूर्ण आराम जरूर करे।

★★★
साथ में काढ़ा जरूर ले★काढ़ा कैसे बनाए★
6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले।

★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★किसमिश 10 पीस
★छुहारे 5 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
★शहद 5 चम्मच

*सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।

3 ग्लास बाकी बचा काढ़ा ठण्डा होने पर
1 ग्लास सुबह
1 दुपहरी
1 शाम को ले।

यह क्रिया 3 दिन लगातार करे।

इस अयूर्वादिक दवा और काढ़े के फायदे जाने।
गले में खराश, खांसने पर भी बलगम नहीं निकल सकता, छाती में दर्द और टीस महसूस होना, बलगम बाहर नहीं आ पाता और रोगी को सटकना पड़ता है, खांसी के साथ कूल्हे में भी दर्द, अत्यधिक बोलने अथवा गाने के कारण गले में खराश, दर्द, बिस्तर की गमीं से एवं शाम के वक्त अधिक परेशानी, ठंडा पानी पीने से आराम मिले, तो साथ ही इसमें रोगी को बार-बार पेशाब जाना पड़ता है और खांसते समय अपने आप ही पेशाब निकल जाता है, सांस अंदर खींचने में अधिक परेशानी होती है।

छाती में लगातार दर्द, जरा-सा हिलते ही छाती में जकड़न, कर्कश आवाज के साथ सूखी खांसी, गहरी व तेज सांसें, सांस छोड़ने पर परेशानी बढ़ती है, खांसने में अधिक शक्ति खर्च करनी पड़ती है, आधी रात के बाद अधिक परेशानी होती है। ठंडी, सर्दीली हवाओं से हो गई हो, तो

सूखी, तीव्र खांसी, खांसते-खांसते मरीज उठकर बैठ जाता है, गर्म कमरे में आने पर अथवा कुछ खाने-पीने पर अधिक खांसी, ऐसा लगना जैसे छाती फट जाएगी, खांसते समय रोगी छाती को हाथों से जकड़ लेता है, हिलने-डुलने-बैठने से परेशानी बढ़ जाती है,
खांसते समय सिर में भयंकर पीड़ा, जैसे सिर फट जाएगा, रोगी दर्द से चिल्ला उठता है और दोनों हाथों से सिर पकड़ लेता है। साथ ही पेशाब की थैली, घुटनों और पैरों में भी खांसते समय दर्द होता है, दर्द के कारण रोगी लेट जाता है,

• यदि बलगम के साथ खांसी आए और बलगम में तीव्र बदबू हो, जिससे रोगी भी परेशान हो

• यदि लंबे अर्से से ऐंठन के साथ बलगमयुक्त खांसी हो, जिसमें खून भी आता हो,

• यदि बलगम अत्यधिक हो और ऐसा लगे,जैसे पूरी छाती इससे भरी हुई है,बलगम की वजह से सीटी जैसी आवाजें सुनाई पड़ती हों, सांस लेने में तकलीफ हों,

• यदि खांसी बहुत जिद्दी हो अर्थात किसी दवा से फायदा न हो रहा हो एवं खांसने में बाई छाती से बाएं कंधे तक दर्द हो और प्राय:सूखी खांसी हो,
• यदि काली खांसी हो और खांसने पर तेज आवाज हो, अधिक जोर लगाना पड़े और लगातार खांसी के दौरे उठते रहें,
यदि खांसी बलगम के साथ हो, रात में बढ़ जाए, झागदार बलगम हो,
• यदि खांसी तुरही अथवा दुंदुभि जैसी आवाज के साथ हो, गले में रूखापन एवं दर्द हो, छाती की मांसपेशियों में अधिक खिंचाव हो,

इन सभी लक्ष्यण में यह दवा रामबाण है।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263

Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा कैसे मगवाएँ

  •  Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा कैसे  मगवाएँ

  *सभी सिद्ध अयूर्वादिक दवा लिस्ट*

अभी whats 94178 62263 पर मैसिज करे।
दवा का नाम लिखे और कैसे मंगवाएं पूछे।
तुरंत आप को जवाब मिलेगा।


■■■
गर्भधारण कल्पचुर्ण

300 ग्राम  1050 रुपये।
कायाकल्प चुर्ण 200 ग्राम 325

टोटल 1375
 दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

             *कायाकल्प चूर्ण*
कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-

मासिक धर्म से 15 दिन पहलह्े कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे।

कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-
 कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।
जैसे :-
बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।

★★★
       सफ़ेद दाग  मूल्य

वजन 400 ग्राम
मूल्य 860
डाक खर्च ताहित (पार्सल रेट)
Speed post 960 रुपये
50 दिन दवा
★★
सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण
400 ग्राम
750 रुपए with डाक खर्च।
30 दिन की दवा
★★★
सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

वजन 500 ग्राम
मूल्य 600  रुपये
40 दिन की दवा
डाक खर्च समेत
◆◆◆




साइनस की दवा
सिद्ध कफ़ कल्पचुर्ण
200 ग्राम 600 रुपये
डाक पार्सल समेत
★★




पीलिया रोग की  आयुर्वेदिक दवा
पीलिया नाशक कल्पचुर्ण

वजन 400 ग्राम र 1050 डाक पार्सल free
21 दिन की दवा
★★
■ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की दवा
40 दिन की दवा 400 ग्राम 1050 रुपये
with कोरियर
★★★

■.बढ़े लिवर, फेंटी लिवर में रामबाण दवा
     ★सिद्ध  लिवर क्ल्पचुर्ण ★


300 ग्राम 750 रुपये with कोरियर
30 दिन की दवा है।
★★★



सिद्ध वातदर्द क्ल्प चुर्ण
300 ग्राम दवा 600 रुपये
500 ग्राम 1000 रुपये
1kg 1800 रुपये
30 दिन की दवा
डाक पार्सल फ्री
★★★


शरीरिक बलवर्धक चुर्ण
400 ग्राम 1050 रुपये
40 दिन की दवा
★★★



शुगर की कामयाब दवा
सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण

500 ग्राम दवा 850 रुपये
40 दिन की दवा
डाक पार्सल फ्री
★★★


खून शुद्धि की अयूर्वादिक दवा
300 ग्राम 750 रुपये
30 दिन की दवा
डाक पार्सल फ्री
★★★


.अधरंग, पक्षाघातकी अयूर्वादिक दवा
लकवे की दवा
400 ग्राम 1260  (आप के लिए 1050)
आयल 200 ग्राम 570 रुपये
★★


शुगर रोगी के लिए
कामक्ल्प चुर्ण
400 ग्राम 1260
★★★
सिद्ध बुद्धिवर्धक चूर्ण

400 ग्राम 1050


"★★★


एक्जिमा और  सोरसिस दवा

सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण

*वजन 400 ग्राम*
*मूल्य 1050 रुपये*
*सिद्ध त्वचा रोग नाशक क्रीम*
          *वजन 100 ग्राम*
           *मूल्य 250 रुपये*
     *Speed पोस्ट 105 डाक खर्च*
      *टोटल 1455 रुपये जमा होंगे।*

                 *30 दिन की दवा

★★
पुराना सिर दर्द नुस्खा
100 ग्राम 300 रुपये
★★
■ई
पीरियड की कैसी भी समस्या हो
*नारी समस्या निदान कल्पचुर्ण*
200 ग्राम 550 रुपये
★★
मोटापा कम करने का योग
मोटापा नाशक कल्पचुर्ण
500 ग्राम 860 रुपये
1 kg  1500 रुपये
सभी दवा का डाक खर्च साथ ही है।
★★★
■  
सिद्ध कफ़ चुर्ण
300 ग्राम 750 रुपये
★★★
कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 700 रुपये।
★★
खून शुद्वि की दवा
सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण
300 ग्राम 750 रुपये
★★
  बुखार की दवा
    *सिद्ध ज्वर नाषक कल्पचुर्ण*
200 ग्राम दवा 400 रुपये with
कोरियर खर्च
◆◆
सिद्ध नाड़ी दुर्बलता कल्प चूर्ण
400 Gram 1050 रुपये
★★
■ त्वचा कल्पचुर्ण
दाद खाज खुजली के लिए।
300 ग्राम
750 रुपये
***
■■■
कैंसर की दवा
सिद्ध कैंसर नाशक कल्पचुर्ण
40 दिन की दवा
वजन 400 ग्राम
मूल्य 1050 रुपये सिद्ध आयुर्वेदिक
■■■
सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण
300ग्राम -1550 र
30 दिन की दवा
वजन 400 ग्राम
मूल्य 2050
40 दिन की दवा with डाक खर्च।
सेवन विधि
सुबह शाम शाम खाने के 1घंटे के बाद मीठे दूध से ले।
नोट- सूगर के मरीज न ले।
धातु ,शक्राणु, मर्दाना और शीघ्रपतन की यह रामबाण दवा है।
*20 मिनट सफल  संभोग क्रिया*
*पेशाब में गर्मी की जलन, गर्मी कारण इंफेक्शन जड़ से खत्म होगी।*
*सपनदोष नही होगा*
*धातु रोग जड़ से खत्म होगा*
नोट
* सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के साथ शिश्न की लगातार मालिश जरूर करे*
नारियल तेल 100 ml
काला तिल तेल 50 ml
बादाम तेल      25 ml
इतर गुलाब  5ml
दोनों को मिलाकर 10 मिनट सुबह 10 मिनट शाम को शिश्न की मालिश जरूर करे।
शिश्न नाड़ियों की कमजोरी दूर होगी
हमारी गरंटी होगी।
■■■
लकोरिया और धातु की दवा
सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचुर्ण
वजन 300 ग्राम
मूल्य 1050
★★
नोट
दवा डाक से जाएगी।
डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।
पर
Speed post का 4 अलग से होगा।
अपना पता साफ साफ लिखे।
आप को पहले अकाउंट मे
दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।
फिर आप को दवा कोरियर होगी ।
हमारा अकाउंट है है -:
*Paytm9417862263*
Swami veet das c/ ranjit Singh
*State bank of india*
*A/c -65072894910*
Ranjit Singh
Bank code -50966
*Ifsc code -sbin0050966*
Sarhind barach
Fatehgarh sahib (punjab )   

★★★
नोट
दवा डाक से जाएगी।
डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।
पर
Speed post का 4 अलग से होगा।
अपना पता साफ साफ लिखे।
आप को पहले अकाउंट मे
दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।
फिर आप को दवा कोरियर होगी ।
हमारा अकाउंट है है -:
*Paytm9417862263*
Swami veet das c/ ranjit Singh


*State bank of india*
*A/c -65072894910*
Ranjit Singh
Bank code -50966
*Ifsc code -sbin0050966*
Sarhind barach
Fatehgarh sahib (punjab )   

यूरिक एसिड औषधि- सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण




 सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण
     यूरिक एसिड की रामबाण औषधि
            *समस्त शरीरिक दर्दों के लिए          
    यह दवा रामबाण है 

   *इंग्लिश दर्द युक्त दवाईयों से मुक्ति पाएं*
          ★समस्त वात रोग में रामबाण★
   ★आस्टि़यो आर्थराईटिस जोड़ों के दर्द कारगर★
        *मांसपेशी संबंधी समस्या में कारगर*

असामान्य रूप से चलना, ढीली मांसपेशियां, मांसपेशियों में कमज़ोरी, मांसपेशी का नुकसान, या मांसपेशी का स्थायी रूप से छोटा होना

★*सुस्ती रहती हो, थकावट और कमजोरी महसूस हो,
नींद न आती हो ,शरीर में भारापन और पेट की खराबी रहत  हो तो यह रामबाण होगी
*केसी भी सूजन यह दवा कम करेगी*

          यह दवा शुगर के मरीज भी ले ।
         यह योग शुगर को भी नार्मल करता है।
★सायटिका दर्द
★स्तन दर्द
★Vrushan bagअण्डकोश की थैली(अंडकोश और निचले पेट का दर्द दर्द)
★*नाक का मांस बढ़ा होने का दर्द*
★नाक जंतु (Polyps) दर्द और सूजन
◆*चेहरे की नसो मे दर्द*
◆ *Frozen shoulder_जमा हुआ( Frozen shoulder) या जकड़ा हुआ कन्धा में यह दवा रामबाणहै*
◆अफस्फीत शिराएं(Varicose veins) दर्द
◆सर्वकल दर्द
◆ पुरपडी (आंख से लेकर कान तक)दर्द
◆छाती का दर्द
◆घुटनों का दर्द,
◆जोड़ा का दर्द और सुजन,
◆कमर दर्द ,गठिया दर्द
◆समस्त शरीर का दर्द
◆युरिक एसिड दर्द
◆माइग्रेन का दर्द
◆डिस्क का दर्द
◆सिर (आधा) दर्द
◆नस ब्लॉक दर्द
★बुखार के बाद होने वाला दर्द
◆नजला के दर्द
यह दवा सभी प्रकार के दर्दो के लिए है क्योंकि यह दवा हमारे शरीर मे रोग प्रीतिरोधक जीवाणुओं को बढ़ाती है।
अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो गया हो तो यह दवा कारगर होगी
दवा क्या है
इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम
सौंठ भुनी 50 ग्राम
सोंठ, काली मिर्च और पीपर – 5-5 ग्राम।
पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड, अजवायन, सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा, गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, शतावरी, मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।
योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।
दवा तैयार हो गई ।
सेवन विधि -
1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।
☆☆☆
घुटनों के दर्द में दवा के साथ
यह जरूर करे
दिन 2 बार
3 लीटर पानी में 200 ग्राम नमक 200 ग्राम सरसों का तेल डालकर गरम कर लें। फिर उस पानी में कपड़ा भिगोकर लगभग 10 मिनट तक नित्य सेंकाई करें।
☆☆☆☆
परहेज -:
         *घुटने दर्द में क्या खाएं क्या नहीं*
अपथ्य भोजन:- (तीन से छह महीनों तक क्या न खाएं):- केला,सब खट्टे फल व पदार्थ ( नींबू, अचार इत्यादि) सब ठंडे पदार्थ, सब सूखे मेवे खासकर काजू ,बादाम इत्यादि उड़द दाल का उपयोग न करे। जोड़ो के दर्द ठीक होने में कब्ज सबसे बड़ी समस्या है इसलिये पेट का रोज साफ होना जरूरी है।
पथ्य:- दिन में भोजन के पहले गेंहू के दाने के बराबर चुना थोड़े से देशी गुड़ व देशी गाय के घी के साथ खाएं । कम से कम 20 मिनट धूप में (कम से कम कपड़े पहन कर ) बैठे।
घुटने के दर्द में केवल ठंडी तथा वायु बनाने वाली चीजों का उपयोग वर्जित है।
फलों तथा हरी तरकारियों का सेवन अधिक करें| मट्ठा, चाट, पकौड़े, मछली, मांस, मुर्गा, अंडा, धूम्रपान आदि का सेवन बिलकुल न करें।
घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए|।
पेट को साफ रखें तथा कब्ज न बनने दें|।
दूध के साथ ईसबगोल की भूसी का प्रयोग करें।
शरीर को अधिक थकने वाले कार्य न करें।
प्रतिदिन सुबह-शाम टहलने के लिए अवश्य जाएं।
***
☆साथ मे यह करे ज्यादा फायदा होगा ☆
आलू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, लाल मिर्च, अत्‍यधिक नमक, बैगन आदि न खाये।
घुटनो की गर्म व बर्फ के पैड्स से सिकाई करे।
घुटनो के निचे तकिया रखे।
वजन कम रखे इसे बढ़ने न दे।
ज्‍यादा लम्बे समय तक खड़े न रहे।
आराम करे दर्द बढ़ाने वाली गति विधिया न करे इससे आपका दर्द और बढता जायेगा और आप इसे सहन नहीं कर पाएंगे।
सुबह खली पेट तीन से चार अखरोट खाये, विटामिन इ युक्त खाना खाये धुप सेके।
               सिद्ध आयुर्वेदिक
                  9417862263

सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण ~ बढ़े लिवर, फेंटी लिवर में रामबाण दवा

सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण
  बढ़े लिवर, फेंटी लिवर में रामबाण दवा


*Online मगवाएँ -whats करे 94178 62263*
★*सुबह पेट साफ ओर सभी पेट की बीमारी    ठीक होगी*
★ *एक दम हल्का महसूस होगा।*
★*खून साफ औऱ शुद्ध होने लगेगा*
★*लिवर इन्फ़ेक्सन SGOT का इलाज है*
          *सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण*

त्रिफला          100 ग्राम
भृंगराज चूर्ण   100 ग्राम
गिलोय           100 ग्राम
अजवायन      100 ग्राम
करेला चुर्ण     100 ग्राम
तुलसी पंचाग  100 ग्राम
सोंठ               50 ग्राम
अडूसा            50 ग्राम
पिपली छोटी    50 ग्राम
त्रिकुट             50 ग्राम
मुलहठी           20 ग्राम
 हल्दी              20 ग्राम
अतीस             20 ग्राम
चिरायता          20ग्राम
काला नमक     20 ग्राम
सेंधा नमक       20 ग्राम

सभी जड़ी बूटियों को पीसकर चुर्ण बना ले।
सेवन विधि

    1 बार मे 2 ग्राम (1चम्मच) पानी के साथ ले।
                 दिन में 3 बार दवा ले।
( बच्चों को 1 ग्राम आधा चम्मच ही दे दिन में 2 बार)
                 21 दिन का कोर्स पूरा करे।

लिवर की सभी बीमारी ठीक होगी।
अगर आप कभी कभी इस चुर्ण को लेते हैं तो कभी लिवर की बीमारी नही होगी।
★★★
नोट
★नही बना सकते तो online मंगवाए★
          ★जिगर की सूजन का कारण★

लीवर कमज़ोर होना या लीवर की खराबी, इस बिमारी के कई कारण हो सकते है। लीवर में दर्द होना, भूख कम लगना आदि इस बिमारी के सामान्य लक्षण है।

जिगर की सूजन का प्रमुख कारण भोजन को चबाए बिना निगल जाना, ठूंस-ठूंसकर तेल, मिर्च, मसालेदार पदार्थों तथा खट्टी, चटपटी चीजों का सेवन करना होता है| रात्रि का भोजन करने के बाद अधिक देर तक जागकर कार्य करने से भी जिगर में सूजन उत्पन्न हो सकती है| दिनभर कुछ न कुछ खाते रहने से भी पाचन क्रिया विकृत होकर जिगर में सूजन का कारण बन जाती है|

लिवर की खराबी का अगर सही समय पर इलाज़ न हो तो आगे जाकर यह बिमारी विकराल रूप ले सकती है, यहाँ तक की जान भी जा सकती है।

लिवर में सूजन आ जाने से खाना आँतों मे सही तरीके

★★★
          ★ खराब लिवर के लक्षण★
◆यूरिक एसिड बढ़ना
◆कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना
◆पेट में सूजन आना.
◆शरीर में थकावट.
◆छाती में जलन होती है
◆ पेट मे भारीपन महेसुस होता है.
◆पेट में कब्ज,  गैस बनने की समस्या.
◆शरीर में आलसपन आना.
◆शरीर में कमजोरी आना.
◆लीवर बड़ा हो जाता है.
◆मुह का स्वाद ख़राब होता है.

इस रोग में जिगर में सूजन आ जाती है| वह शनै:-शनै: सिकुड़कर छोटा तथा कठोर हो जाता है| रोगी को अपच, उबकाई एवं वमन की शिकायत होने लगती है| भूख नहीं लगती| शरीर का वजन कम होने लगता है| पेट दर्द, त्वचा में पीलापन, हल्का ज्वर तथा शारीरिक और मानसिक थकावट के लक्षण प्रकट होने लगते हैं| पेट की नसें फूल जाती हैं| शरीर तथा चेहरे पर मकड़ी के जाले-से हल्के चिह्न दिखाई देने लगते हैं|

लिवर में सूजन आ जाने से खाना आँतों मे सही तरीके से नहीं पहुँच पाता और ठीक तरह से हज़म भी नहीं हो पाता। ठीक तरह से हज़म न हो पानें से अन्य तरीके के रोग भी उत्पन्न हो सकते है। इसलिए लीवर की खराबी का पक्का, आसान और पूरी तरह से आयुर्वेदिक इलाज़ हम आपके लिए लेकर आये है जिससे लिवर की खराबी से निजात मिल जाएगी।

★★★

     ★ इन उपायों को साथ इसके साथ करे ★

● दो सप्ताह तक चीनी अथवा मीठा का इस्तेमाल न करें। चीनी के बजाय दूध में चार-पाँच मुनक्का डाल कर मीठा कर लें। रोटी भी कम खायें। अच्छा तो यह है कि जबै उपचार चलता रहे रोटी बिल्कुल न खाकर सब्जियाँ और फल से ही गुजारा कर लें।

 सब्जी में मसाला न डालें। टमाटर, पालक, गाजर, बथुआ, करेला, लौकी आदि शाक-सब्जियाँ और पपीता, ऑवला, करें।

 धी और तली वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें। पन्द्रह दिन में जिगर ठीक हो जाएगा।
★★★

जिगर का संकोचन में दिन में दो बार प्याज खाते रहने से भी लाभ होता है।

जिगर रोगों में छाछ (हींग का बगार देकर, जीरा काली मिर्च और नमक मिलाकर) दोपहर के भोजन के बाद सेवन करना बहुत लाभप्रद है।
◆◆◆
आँवला का रस 25 ग्राम या सूखे ऑवलों का चूर्ण चार ग्राम पानी के साथ, दिन में तीन बार सेवन करने से 15-20 दिन में यकृत के सारे दोष हो जाते हैं।

★★★

एक सौ ग्राम पानी में आधा नीबू निचोडकर नमक (चीनी की जाय) डालें और इसे दिन में तीन बार पीने से जिगर की खराबी ठीक होगी।
7  से 21 दिन लें।
★★★
जामुन के मौसम में 200-300 ग्राम दिया और पके हुए जामुन प्रतिदिन खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर हो जाती है।
★★★

 तिल्ली अथवा जिगर (यकृत) व तिल्ली (प्लीहा) दोनों के बढ़ने पर पुराना गुड़ डेढ़ ग्राम और बड़ी (पीली) हरड़  का चूर्ण बराबर वजन मिलाकर एक गोली बनायें और ऐसी गोली दिन में दो बार प्रातः सायं हल्के गर्म पानी के साथ एक महीने तक लें।

 इससे यकृत (Liver) और प्लीहा (Spleen) यदि दोनों ही बढ़े हुए हों, तो भी ठीक हो जाते हैं।

विशेष-इसके तीन दिन के प्रयोग से अम्लपित्त का भी नाश होता है।

परहेज और आहार

लेने योग्य आहार
सब्जियाँ।
लीन मीट।
फलियाँ।
ताजे फल।
डेरी उत्पाद।
स्वास्थ्यवर्धक वसा और तेल।
अंडे।
साबुत अनाज।
इनसे परहेज करे
शक्कर का या अधिक शक्कर युक्त आहार।
सोडा और सोडा युक्त फ्रूट पन्चेस।
संतृप्त वसा।
शराब।

सिद्ध अयूर्वादिक
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
https://ayurvedasidh.blogspot.com/2018/02/blog-post_17.html

सिद्ध फाइलेरिया नाशक कल्पचुर्ण



     *सिद्ध फाइलेरिया नाशक कल्पचुर्ण*
  *Online मगवाएँ-94178 62263*

त्रिफला       250 ग्राम
गिलोय चुर्ण 200 ग्राम
त्रिकुटा       200 ग्राम
ब्राहिमी बूटी 100ग्राम
संखपुष्पी    100 ग्राम
अगर         100 ग्राम
सौंठ भुनी   100 ग्राम
बेल चुर्ण       50 ग्राम
शिलाजीत    30 ग्राम
सेंधा नमक 125 ग्राम

सभी चुर्ण को 400 ग्राम एलोवेरा रस औऱ 200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।
सेवन विधि
फ़िर सूखा कर दिन में 3 बार ताजे पानी से एक एक चम्मच लेते रहे।
★90 दिन में 60 से 80 % लाभ  होगा।
★90 दिन उपयोग के बाद दवा को छोड़ दे।
★यह दवा छोड़ने पर भी असर करती रहेगी।
*जरूरत अनुसार फिर चालू कर सकते हैं*
        *साथ मे यह भी अपनाएं*
फाइलेरिया बिमारी के कई अन्य नाम भी हैं जैसे कि हाथीपाँव, फीलपाँव, श्लीपद आदि.
ये बिमारी उष्णकटिबंध देशों में सामान्य है. इसकी उत्पति परजीवी (पेरेसिटिक) निमेटोड कीड़ों के कारण होता है जो छोटे धागों जैसे दिखते हैं. यह बीमारी फिलेरी वुचरेरिअ बैंक्रोफ्टी, ब्रूगिआ मलाई और ब्रूगिआ टिमोरि नामक निमेटोड कीड़ो के कारण होती है. फाइलेरिया के सबसे ज़्यादा मामले वुचरेरिअ बैंक्रोफ्टी नामक परजीवी के कारण होते हैं. फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता और विरूपता का सबसे बढ़ा कारण है. यह ज़्यादातर गरीब लोगों को होता है क्योंकि जहाँ गरीब लोग रहते हैं वहाँ मच्छरों की प्रजननता अधिक होती है. एलीफेंटिटिस यानि श्लीपद ज्वर एक परजीवी के कारण फैलती है जो कि मच्छर के काटने से शरीर के अंदर प्रवेश करता है. इस बीमारी से मरीज के पैर हाथी के पैरों की तरह फूल जाते हैं. इस रोग के होने से न केवल शारीरिक विकलांगता हो सकती है बल्कि मरीजों की मानसिक और आर्थिक स्थिति भी बिगड़ सकती है.
एलीफेंटिटिस को लसीका फाइलेरिया भी कहा जाता है क्योंकि फाइलेरिया शरीर की लसिका प्रणाली को प्रभावित करता है. यह रोग मनुष्यों के हाथ-पैरों के साथ ही जननांगों को भी प्रभावित करता है. आइए फाइलेरिया को दूर करने के लिए उसके उपचार हेतु कुछ घरेलू उपायों पर प्रकाश डालें.
1. लौंग
लौंग फाइलेरिया के उपचार के लिए बहुत प्रभावी घरेलू नुस्खा है. लौंग में मौजूद एंजाइम परजीवी के पनपते ही उसे खत्म कर देते हैं और बहुत ही प्रभावी तरीके से परजीवी को रक्त से नष्ट कर देते हैं. रोगी लौंग से तैयार चाय का सेवन कर सकते हैं.
2. काले अखरोट का तेल
काले अखरोट के तेल को एक कप गर्म पानी में तीन से चार बूंदे डालकर पिएं. इस मित्रण को दिन में दो बार पिया जा सकता है. अखरोट के अंदर मौजूद गुणों से खून में मौजूद कीड़ों की संख्या कम होने लगती है और धीरे धीरे एकदम खत्म हो जाती है. जल्द परिणाम के लिए कम से कम छह हफ्ते प्रतिदिन इस उपाय को करें.
3. भोजन
फाइलेरिया के इलाज के लिए अपने रोज के खाने में कुछ आहार जैसे लहसुन, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खुबानी आदि शामिल करें. इनमें विटामिन ए होता है और बैक्टरीरिया को मारने के लिए विशेष गुण भी होते हैं.
4. आंवला
आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है. इसमें एन्थेलमिंथिंक भी होता है जो कि घाव को जल्दी भरने में बेहद लाभप्रद है. आंवला को रोज खाने से इंफेक्शन दूर रहता है.
5. अश्वगंधा
अश्वगंधा शिलाजीत का मुख्य हिस्सा है, जिसके आयुर्वेद में बहुत से उपयोग हैं. अश्वगंधा को फाइलेरिया के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
6. ब्राह्मी
ब्राह्मी पुराने समय से ही बहुत सी बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है. फाइलेरिया के इलाज के लिए ब्राह्मी को पीसकर उसका लेप लगाया जाता है. रोजाना ऐसा करने से रोगी सूजन कम हो जाती है.
7. अदरक
फाइलेरिया से निजात के लिए सूखे अदरक का पाउडर या सोंठ का रोज गरम पानी से सेवन करें. इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट होते हैं और मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है.
8. शंखपुष्पी
फाइलेरिया के उपचार के लिए शंखपुष्पी की जड़ को गरम पानी के साथ पीसकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे सूजन कम होने में मदद मिलेगी.
9. कुल्ठी
कुल्ठी या हॉर्स ग्राम में चींटियों द्वारा निकाली गई मिट्टी और अंडे की सफेदी मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं. इस लेप को प्रतिदिन प्रभावित स्थान पर लगाएं, सूजन से आराम मिलेगा.
10. अगर
अगर को पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें. इस लेप को प्रतिदिन 20 मिनट के लिए दिन में दो बार प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे घाव जल्दी भरते हैं और सूजन कम होती है. घाव में मौजूद बैक्टीरिया भी मर जाते हैं.
11. रॉक साल्ट - शंखपुष्पी और सौंठ के पाउडर में रॉक साल्ट मिलाकर, एक एक चुटकी रोज दो बार गरम पानी के साथ लें.
Whats 94178 62263

बच्चों में सर्दी और खांसी ~घर बनाएं तेल


             *बच्चों में सर्दी और खांसी*
           *घर बनाएं तेल*

सरसों तेल 200 ग,अजवाइन 50 ग,लहसुन10 कली

एक कप सरसो के तेल में अजवाइन और लहसुन
की दस कलियां लेकर उसे पकाए, थोड़ा ठंडा होने
पर उससे बच्चे की मालिश करे। सरसों के तेल,
लहसुन और अजवाइन में कीटाणु-रोधक और विषाणु-रोधक
गुण होते हैं। यह आपके बच्चे को काफी मात्रा में
आराम प्रदान करने में सहायता करता है।

         *सिद्ध आयुर्वेदिक से जुड़े सदा स्वस्थ रहे*
               whats 94178 62263

*सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण*



                  *सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण*



             *बढ़े ह्रदय की रामबाण दवा*
★यह दवा अधरंग के दौरे को भी ठीक करती है★
      ★पोटेशियम की कमी को दूर करता है★
        ★ह्रदय का वाल बंद हो यह दवा करे★
          ★ खराटे की समस्या ठीक होगी★
          *Bp हाई रहता है तो ठीक होगा*
      दिल में तेज दर्द होने पर बेचैनी हो जाती है। हृदय में दर्द अचानक उठता हैं और बाएं कंधे तथा बाएं हाथ तक फैल जाता है। सांस फूलना, घबराहट बढ़ जाना, ठंडा पसीना आना तथा बेहोश हो जाना, जी मिचलाना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना तथा नब्ज कमजोर मालूम पड़ना इस रोग के अन्य लक्षण हो तो यह दवा रामबाण है।
★★★
जिन को हदय का अटैक हुआ है उन को दवा कारगर है।
जिस रोगी के दिल का आकार बढ़ा हो और सांस लेने में मुश्किल हो वो यह दवा बनाए ओर सेवन करे।
★★
यह दवा आप खुद बना सकते है।
★★
यह सभी समान पन्सारी से आसानी से मिल जाता हैं।
नही तो online मंगवा सकते हैं।
ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की
          अयूर्वादिक दवा
अर्जन छाल चुर्ण 200 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
बेल चुर्ण 100 ग्राम
त्रिफला 100 ग्राम
अश्वगंधा50 ग्राम
तुसली बीज 50 ग्राम
पुनर्नवा 50 ग्राम
राई 50 ग्राम
अकरकरा 50 ग्राम
मुलेठी 50 ग्राम
कुटकी 50 ग्राम
इन्द्रयाण अजवायन 50 ग्राम
बरगद का दूध 50 ग्राम
जावित्री 20 ग्राम
दालचीनी 20 ग्राम
पीपला मूल 20 ग्राम
छोटी इलायची 20 ग्राम
:हींग10 ग्राम
बच10 ग्राम
सोंठ10ग्राम
जीरा10ग्राम
कूट10ग्राम
जवाखार10 ग्राम
सभी को कूट छानकर चुर्ण बनाए औऱ 200 ग्राम गिलोय रस औऱ 500 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे 
सायं में सुखा कर सेवन करे।

सेवन विधि
यह 90 दिन का कोर्स होगा।
2 ग्राम (1 चमच्च)  ताजे पानी से ले।
सेवन विधि
यह 90 दिन का कोर्स होगा।
2 ग्राम (1 चमच्च)  ताजे पानी से ले।
Whats 94178 62263
दिन में 3 बार 21 दिन ले।
★21 दिन के बाद अगले 90 दिन सुबह शाम ले।
दिन 2 बार दवा ले।
★★★
भोजन और परहेज:
★अत्यधिक गर्म एवं ठंडे दोनों खाद्य-पदार्थों से बचें।
अधिक परिश्रम, सहवास, घी, मलाई, मक्खन आदि हानिकारक है।
★तम्बाकू, जर्दा, चाय, कॉफी, शराब एवं अन्य नशीली चीजें तथा मांस-मछली, गर्म मसाला आदि का सेवन करना मना है।
★हृदय-रोग में शीर्षासन कभी न करें।
★ रोगी को हाइड्रोजनकृत चर्बी जैसे- घी, मक्खन, वनस्पति, नारियल का तेज, नकली मक्खन या ताड़ का तेल आदि का उपयोग भोजन में नहीं करना चाहिए।
इन तेलों की जगह रोगी को सोयाबीन तेल, सूर्यमुखी तेल या कुसुम कराड़ी तेल का उपयोग करना चाहिए। पापकार्न, मजोला या सफोला तेल का भी उपयोग भोजन बनाने में कर सकते हैं।
★★★
क्रीम, पनीर या दूध से बने दही या अन्य मिठाईयां जो गाढ़े दूध से बनी हो जैसे- गुलाब जामुन, मावा, चाकलेट तथा रसगुल्ले आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
★★★
यह करते रहे
रोजाना ध्यान में घंटा भर बैठना, प्राणायाम, आसन, व्यायाम, हर रोज आधा घंटा घूमने जाना और चर्बी बढऩे से रोकने के लिए सात्विक या शाकाहारी भोजन अत्यंत लाभकारी है। दूसरे शब्दों में कहें तो एक स्वस्थ आहार, धूम्रपान छोडऩे, एक स्वस्थ वजन बनाए रखने और तनाव से खुद को बचाए रखना भी काफी अहम है।
★★
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263


*सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा*



         *सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा* 
          

             ★काढ़ा कैसे बनाए★


Online मगवाएँ -whats 94178 62263

*सर्दी, जुकाम, बुखार, काली खाँसी,रेशा, निमोनिया, फेफड़ों के इंफेक्शन, लिवर खराबी, बच्चों में बड़ी/छोटी माता (चेचक)
और भी अनेकों फायदे से भरपूर है सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा*

   *6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।*
       *उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले*

★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★किसमिश 10 पीस
★छुहारे 5 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
★सोंठ 2 ग्राम (आधा चमच्च)
मुलेठी आधा चम्मच
★काली मिर्च आधा चम्मच
★दालचीनी आधा चम्मच
सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।


सेवन विधि

*200 ग्राम काढ़ा गर्म चाय की भांति उपयोग करे*


*बच्चों को आधी मात्रा में दे।*


* 1 से 3 साल के बच्चों को 5 चमच्च एक बार मे दे*


दिन में 4 बार सिद्ध सर्दी नाशक काढ़े का इस्तेमाल करे।

यह क्रिया 3 से 5 दिन लगातार करे।
फायदे 


वातरोग, वातदर्द, गठिया वात, wbc, जुकाम, खासी,चेचक, टाइफाइड औऱ किसी भी प्रकार की इंफेक्शन में कारगर है।


सिद्ध आयुर्वेदिक
Whats 94178 62263