Thursday, 28 February 2019

खून अशुद्धि के अयुर्वेदिक घरेलु उपाय

खून अशुद्धि के अयुर्वेदिक घरेलु उपाय


        सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण 
         Online मगवां सकते हैं।
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 ।। रक्त विकार के कारण ।।

●आयरन की कमी
●अनुवांशिक
●कमजोर लीवर
●हार्मोन बदलाव
●गलत आहार
●डायबिटीज
●तनाव
●पानी की कमी
  ।।रक्त विकार के लक्षण।।

●लगातार बीमार रहना
●भूख ना लगना
●वजन कम होना
●त्वचा रोग
●दृष्टि कमजोर हो जाना
●बाल झाड़ना
●प्रतिरोधक क्षमता कम होना
 
  ।।रक्त विकार के घरेलू उपचार।।

1. आंवला

विटामिन सी के गुणों से भरपूर आंवला का सेवन शरीर से विषैले पर्दाथों को बाहर निकालता है और नए रक्त बनाता है।
2. नींबू

दिन में 3 बार गर्म पानी में नींबू मिलाकर सेवन करें। इससे आपके सभी प्रकार के रक्त विकार दूर हो जाएंगे।

3. मुनक्का

25 ग्राम मुनक्के को रातभर भिगो दें। सुबह इसे पीसकर 1 कप पानी में मिलाकर रोजाना पीएं। इससे आपकी यह समस्या दूर हो जाएगी। 
4. एलोवेरा

25 ग्राम एलोवेरा का ताजा रस में 12 ग्राम शहद और आधे नींबू का रस मिलाकर सुबह शाम पीने से रक्त विकार दूर होते है।

5. करेला

दिन में 2 बार ताजे केरेले का जूस का सेवन भी सभी प्रकार के रक्त विकारों को दूर करता है।
6. प्याज

1/4 कप प्याज के रस में नींबू शहद मिलाकर लगातार 10 दिन तक सेवन करें। यह रक्त विकारों को दूर करके खून साफ करने में मदद करता है।

7. नीम

नीम के पत्ते, निम्बोली छाल और जड़ को उबाल कर दिन में 1 बार पीएं। इससे रक्त विकार के साथ आपकी कई समस्याएं दूर हो जाएगी।

Monday, 25 February 2019

बसंत ऋतु के रोग औऱ इलाज

बसंत ऋतु के रोग औऱ इलाज




      
     *बसंत ऋतु में आयुर्वेदिक दवाएं*
                *और खान-पान*


बसंत ऋतु में कफ़ रोग, लीवर रोग , ह्र्दय रोग और खून अशुद्धि जैसे रोग उतपन्न होते हैं।
इसे कच्ची मौसम के रोग भी बोला जाता है।
सिद्ध आयुर्वेदिक औषधियों इस मौसम के हिसाब से निर्मत की जाती है।

।।वसंत ऋतु इस्तेमाल करने योग्य सिद्ध चुर्ण।।

1.सिद्ध कफ़ नाशक कल्पचुर्ण
2.सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण
3.सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण
4.सिद्ध खून शुद्धि कल्पचुर्ण

लिंकः देख सकते टच करे
Sidhayurvedic.com
हिन्‍दू कैलेंडर के हिसाब से15 मार्च से 15 मई का वक्‍त वसंत ऋतु का होता है। 

वसंत ऋतु का शरीर  पर क्‍या असर पड़ता है?
 यह वक्‍त गर्मी और सर्दी के बीच का होता है इसलिए ठंड और गर्मी दोनों का इफेक्‍ट होता है। दिन में गर्मी और रात को ठंडक होती है।

इस मौसम में कफ दोष बॉडी पर और हावी होने लगता है।

वजह ये है कि इससे पहले वाले मौसम यानी शिशिर ऋतु में बॉडी में जमा कफ अब गर्मी होने पर पिघल जाता है।

इससे खासतौर पर पचाने की ताकत पर असर पड़ता है। साफ तौर पर कहें तो खाने को पचाने वाली आग जिसे जठराग्‍नि कहते हैं, कमजोर पड़ जाती है।
एक तो वैसे ही इस मौसम में कफ का असर ज्‍यादा होता है उसमें अगर आपने कफ बढ़ाने वाली चीजें थोड़ी बहुत भी खा लीं तो समझें टांसिल्‍स, खांसी, गले में खराश, जुकाम, सर्दी और कफ व बुखार का हमला हो सकता है।

            ।।बसंत ऋतु में खान -पान।।
   वसंत ऋतु में कफ की समस्या अधिक रहती है। अतः इस मौसम में जौ, चना, ज्वार, गेहूं, चावल, मूंग, अरहर, मसूर की दाल, बैंगन, मूली, बथुआ, परवल, करेला, तोरई, अदरक, सब्जियां, केला खीरा, संतरा, शहतूत, हींग, मेथी, जीरा, हल्दी, आंवला आदि कफनाशक पदार्थों का सेवन करें|
   इसके अलावा मूंग बनाकर खाना भी उत्तम है।

◆◆
                   बसंत ऋतु में 
                ।। घरेलू नुस्खे।।

  नागरमोथा अथवा सोंठ डालकर उबाला हुआ पानी पीने से कफ का नाश होता है।
मन प्रसन्न रखें एवं जो हृदय के लिए हितकारी हों ऐसे आसव अरिष्ट जैसे कि मध्वारिष्ट, द्राक्षारिष्ट, गन्ने का रस, सिरका आदि पीना लाभदायक है। 

●◆◆
          ।।सिद्ध हिर्दय कल्पचुर्ण ।।

आप अगर बसंत ऋतु में इस्तेमाल करते हैं तो आप को कभी हार्ट अटैक नही होगा *

सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिए link देखे:- 

●●
   इस ऋतु में कड़वे नीम में नई कोंपलें फूटती हैं। नीम की 15-20 कोंपलें, 2-3 काली मिर्च के साथ चबा-चबाकर खानी चाहिए।

15-20 दिन यह प्रयोग करने से वर्ष भर चर्म रोग, रक्त विकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा करने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है एवं आरोग्यता की रक्षा होती है। 

इसके अलावा कड़वे नीम के फूलों का रस 7 से 15 दिन तक पीने से त्वचा के रोग एवं मलेरिया जैसे ज्वर से भी बचाव होता है।

●●
          ।।सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण।।

*बसंत ऋतु में इस्तेमाल करे खून शुद्वि कल्पचुर्ण*
सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण आप बसंत ऋतु में अगर इस्तेमाल करते हैं तो खून सबंधी जितने भी रोग होते हैं सभी साल भर के लिए आप ठीक हो जाएंगे।
सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिंक देख सकते हैं।
https://wp.me/paDg1r-2H

◆◆

   धार्मिक ग्रंथों के वर्णनानुसार चैत्र मास के दौरान अलौने व्रत याने बिना नमक के व्रत करने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है एवं त्वचा के रोग, हृदय के रोग, उच्च रक्तचाप( हाई बीपी), गुर्दा, किडनी आदि के रोग नहीं होते। 

   वसंत ऋतु में दही का सेवन न करें क्योंकि वसंत ऋतु में कफ का स्वाभाविक प्रकोप होता है एवं दही कफ को बढ़ाता है। अतः कफ रोग से व्यक्ति ग्रसित हो जाते हैं।

      वसंत के मौसम में क्‍या नहीं खाना चाहिए
●●

 ।।फेंटी, खःटी औऱ मीठी वस्तुओं से करे परहेज।।

   वसंत में फैटी, खट्टे, मीठे और पेट के लिए भारी चीजें नहीं खानी चाहिए। तली और मसालेदार चीजें कम से कम खाएं। 

दिन में सोना बंद कर दें ऐसा करने से कफ दोष भड़क जाएगा। रात को ज्‍यादा देर तक नहीं जागना चाहिए इससे वायु दोष बढ़ जाता है।

सुबह देर तक सोने से मल सूख जाता है, भूख्‍ देर से लगती है और चेहरे व आंखों की चमक कम हो जाती है। इसलिए इस मौसम में जल्‍दी सोएं और जल्‍दी उठें।

   शीत एवं वसंत ऋतु में श्वास, जुकाम, खांसी आदि जैसे कफजन्य रोग उत्पन्न होते हैं। 

उन रोगों में हल्दी का प्रयोग उत्तम होता है। हल्दी शरीर की व्याधि रोधक क्षमता को बढ़ाती है जिससे शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम होता है। 

  चौथाई चम्मच हरड़ का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटें तो वसंत ऋतु में होने वाले बलगम, ज्वर, खांसी आदि नष्ट हो जाते हैं। मौसम के अनुसार भोजन हमारे शरीर और मन दोनों के लिए हितकारी होता है।

मौसम के अनुसार भोजन में परिवर्तन करके आहार लेने वाले लोग हर समय स्वस्थ और प्रसन्नचित रहते हैं।
   इस मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए रोज एक्‍सरसाइज करें। टहलें, मालिश करें और अगर मौसम में ठंडक है तो गुनगुने पानी से नहा सकते हैं। गर्म पानी से मूत्राशय और मलाशय की अच्‍छे से सफाई करनी चाहिए।

नहाने के बाद बदन पर कपूर, चंदन, अगरू, कुमकुम जैसी खुश्‍बू वाली चीजों का लेप लगा सकते हैं। चाहें तो शाम के वक्‍त दोबारा नहा सकते हैं। ढीले और सूती कपड़े पहनें। 

और जानकारी के whats करे
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Wednesday, 20 February 2019

।। मोटापा कैसे घटाएँ-बिना किसी साइड इफेक्ट के।।

।। मोटापा कैसे घटाएँ-बिना किसी साइड इफेक्ट के।।
■मोटापा कम करने के लिए संपूर्ण जानकारी■

★【आप जी पहले कायकल्प चुर्ण बारे जाने
     जो मोटापा की दवा साथ दिया जाता है]
★【फिर मोटापा की दवा बारे जानकारी देंगे]
★:【फिर दवा कैसे लेनी है यह बताएगे】
★ 【अंत मे मूल्य बताया गया है।】
★★★
                     कायाकल्प चुर्ण
                    सभी रोग के लिए
                  सदैव युवा रखने वाला,
                 शरीर का पूरा कायाकल्प
                 करने वाला सदाबहार चूर्ण
★★★
कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़
को संतुलित करता है
★★★
किसी भी नशे को छुड़ाने में कारगर है काया क्ल्प चूर्ण।
थकान एक पल में दूर होगी। क्योंकि एलोवेरा हर नस को पूर्ण क्रिया में ले आता है।
★★★
आज बढ़ते हुए तनाव, मानसिक थकान, चिंता, शारीरिक रोग ये सब असमय ही इंसान को बूढा बना देती हैं। भरी जवानी में इंसान बूढा नज़र आने लगता हैं। अगर आप अपना योवन कायम चाहते हैं तो आपको यथासंभव तनाव, चिंता को त्यागना होगा
कहा भी जाता हैं के चिंता से बड़ा कोई शारीरिक शत्रु नहीं हैं। योग करे, ध्यान करे, दोस्तों से मिले, बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ समय बिताये, किसी क्लब का सदस्य बनिए,हफ्ते में एक दिन गौशाला जाइए, किसी गरीब को खाना  खिलाएं। इस से आपकी तनाव और चिंता भाग जाएगी।
इसके साथ हम आज आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के एक ऐसे सदाबहार चूर्ण के बारे में जिसको खा कर आप सदा अपने आप को जवान और तंदुरुस्त महसूस करेंगे। बस इसको अपने दैनिक जीवन में शामिल करे।
●●●
क्या है कायाकल्प चूर्ण
(What is Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।
कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं।
लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-
*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना
●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::
*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम
सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।
जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।
सेवन विधि - अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।।
अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मच
सुबह खाली पेट ले ।
●●
काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है
●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।

कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।
दिन में 4 बार दवा ले।
जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।
****
● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग।
●हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-
नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।
● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।
● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व् ओजमय बनती हे
● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांति
काम करता है ।
●ओवरी में सूजन ',पानी भरना' अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।
● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की
भांति काम करता है ।
● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा।
● बालो की वृद्धि तेजी से होती है,
● अनावश्यक चर्बी घटेगी.
● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी
● खून साफ़ होगा
● रक्त नलिकाए साफ़ होगी.
● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे ।
● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।
● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी
नया शुद्ध खून बनेगा.
◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प
रामबाण जैसा काम करता है ।
◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे
बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है ।
● नपुसंकता दूर होती है।
● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण
● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी ।
● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे ,
● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता
दात मजबूत होते है।
● हड्डीया मजबूत होती है।
● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है।
◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा ।
●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है।
● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है ।
● आयु बढ़ेगी
● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है।
◆ Diabetes काबू में रहती है।
● कफ से मुक्ति मिलती है।
परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं
.
         
●●●●
             *सिद्ध मोटापा नाशक कल्पचुर्ण*
             ■मोटापा कम करने का योग ■  
            ¶यह एक फ़ूड है इस योग का
    कोई साइड इफेक्ट्स और नुकसान नही है।¶
            【बाजार में  मिलने वाली दवाएं
        हड्ड़ी रोग का कारण बन सकती हैं।】
★★★
नोट -: online दवा मंगवाए जिस में हम आप को साथ मे कायकल्प चुर्ण भी देगे। जो आप की नाड़ी तंत्र को शुद्ध और साफ करेगा।
कायकल्प  चुर्ण बारे जानने के लिए whats 94178 62263  पर sms करे।
★★★
आप खुद भी बना सकते है।
यह पेट की चर्बी में बहुत अच्छा काम करती हैं।
           आवश्यक सामग्री :
●गुग्गुल(Guggul)- 140 ग्राम
●विलायिती इमली (Camachile)-105 ग्राम (इसे जंगल जलेबी, अग्रेजी इमली, गंगा इमली भी कहते है।)
●त्रिफला (Triphala)- 105 ग्राम
●बेल चूर्ण -105 ग्राम
◆अर्जुन छाल-,105 ग्राम
●यष्टिमधु (Liquorice)-70 ग्राम (इसे मुलेठी भी कहते है।)
◆गिलोय (Tinospora)- 70 ग्राम
●नागरमोथा (Nut grass)- 70 ग्राम (Cyperus Scariosus)
जीरा (cumin)- 70 ग्राम
शुंठी(Shunti)- 70 ग्राम (सोंठ)
★ बनाने की विधि :
उपरोक्त सभी औषिधियों को बारीक-बारीक कूट-पीस ले और महीन छन्नी से छान कर किसी डिब्बे में बंद कर के रख ले-आपकी ये सामग्री कूट-पिस लगभग 700 ग्राम तैयार हो जायेगी।
★ सेवन करने का तरीका :
प्रतिदिन आपको इसमें से दस ग्राम सुबह खाने से पहले गुनगुने पानी से और शाम को खाने के बाद गुनगुने पानी से लेना है ।
बीस ग्राम के हिसाब से एक माह में 600 ग्राम दवा होगी तथा ये एक माह से उपर के लिए हो जायेगी।
तब तक आपका वजन लगभग आठ से दस किलो से जादा कम हो जाएगा।
पेट बढ़ा है 2 से 3 इंच कम हो जाएगा।
पहले माह तेजी से घटता है लगभग छ: से सात किलो फिर थोडा कम घटेगा।
आप इसे आगे भी जारी रख सकते है जब आपको लगे कि आपका वजन और चर्बी अब आपके लिए पर्याप्त है दवा को बंद कर सकते है।
★ आवश्यक परहेज :
भोजन और परहेज :
          मोटापे से परेशान व्यक्ति को मुद्ग, जौ, मूंग का रस, मक्खन, गर्म पानी, बाजरा, गेहूं, ताजा दूध, मुनक्का, संतरा, टमाटर, मसूर, छाछ आदि का सेवन करना चाहिए। मोटे व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह टहलना चाहिए और थोड़ी-बहुत मेहनत भी करनी चाहिए। रोगी को पतला करके दूध, फलों का रस, कॉफी, गर्म करके पीना चाहिए।
          मोटापे के रोगी को गाय का दूध, देशी घी, गाढ़ी दाल, चावल, आलू, गर्म दूध, चीनी से बने पदार्थ, पनीर, आइसक्रीम, मिठाइयां, मांसाहारी भोजन, अधिक चिकनाई व चटपटा पदार्थ, सांभर, सूप, बिस्कुट, केक, नमकीन पदार्थ, जेली, मिठाइयां, बाहर का खाना, देर रात पार्टियों में खाना, नए शालि चावल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। शीतल पानी से नहाना मोटापे के लिए हानिकारक होता है।
तली भुनी चीजे, फास्ट-फ़ूड तथा रिफाइंड आयल का प्रयोग न करे।
Online आप दवा मंगवा सकते हैं।
हम साथ मे काया क्ल्प चूर्ण भी देगे।
जो मोटापे की दवा औऱ मोटापे में हैरानीजनक फायदा करता है।
ऐसे मंगवाएं मोटापा नाशक कल्पचुर्ण
★★★★
70  दिन की दवा होगी
खर्च जाने अब
मोटापा कम करने की दवा 500 ग्राम1050 रुपये
कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम  500  रुपये
टोटल 1550 जमा कराए।
★★★★
सेवन विधि
कायाकल्प चुर्ण 1 चम्मच सुबह खाली पेट।
रात को सोते टाइम पानी से सेवन करे।
★★★
मोटापा दवा दिन 3 बार कभी भी पानी से ले।
परहेज के लिए पोस्ट पढ़े।
★★
नोट
कोरियर  केवल शहर मे ही जाएगा ।
पता शहर का ही दे ।
डाक से गांव में जाएगी दवा ।
अपना पता साफ लिखे।
आप को पहले अकाउंट मे
दवा की राशि जमा करानी होगी
फिर आप को दवा कोरियर होगी ।
हमारा अकाउंट है है -:
Paytm 9417862263
Swami Veet Dass c℅ Ranjit Singh
State bank of india
A/c -65072894910
Ranjit Singh
Bank code -50966
Ifsc code -sbin0050966
Sarhind barach
Fatehgarh sahib (punjab )

Thursday, 14 February 2019

सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण

sidhayurvedic.com
        *सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण*

*फायदे-*

*अंडे का न बनना, गर्भावस्था कमजोरी, गर्भ नली का बंद होना, लकोरिया, गर्भाशय कमजोरी , अंतुसलन हार्मोन, गर्भाशय का छोटापन आदि*

सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण का नुस्खा

पुत्रजीवक          100 ग्राम
शिवलिंगी बीज    100 ग्राम
गजकेसर की जड़  50 ग्राम
पीपल की दाढ़ी      50 ग्राम
ब्रह्मिबुटी               50 ग्राम
तुलसी के बीज       50 ग्राम
गोरखमुण्डी।          50 ग्राम
काकोली का बीज   20 ग्राम
नागकेसर              20 ग्राम
मिश्री                   100 ग्राम

इसकी 5 ग्राम मात्रा को सुबह के समय बछडे़ वाली गाय के 250 मिलीलीटर  दूध से मासिक-धर्म खत्म होने के बाद लगभग 20 दिन तक करना चाहिए।
इसके सेवन से स्त्रियां गर्भधारण के पक्के तौर योग्य बन जाती हैं।

       *गऊ के दूध और दही का खूब सेवन करे।*
परहेज -गर्म ओर खट्टी वस्तु न ले। 
****
नोट
***
अगर आप online मंगवाते है तो हम आप को 2 दवाएं का पैक देगे।

      *जिस से बहुत फायदा होता है।*
     दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

             *कायाकल्प चूर्ण*
कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-
मासिक धर्म से 15 दिन पहले कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे।
कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-
कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।
जैसे :-
बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।
★★
     *गर्भधारण कल्पचुर्ण कैसे उपयोग करे*

*मासिक धर्म बंद होने के 1 दिन बाद कोसे गर्म दूध से सुबह खाने के 30 मिनट बाद और रात को भी ऐसे ही उपयोग करे।*
*ध्यान रहे :-खाने में  दही का उपयोग जरूर करे।*
कोई भी गर्म वस्तु इन दिनों उपयोग न करे।*
           *खुद बनाएं या online मंगवाए*
              Whats 94178 62263
                 Call 89680 62263

Wednesday, 13 February 2019

शरीर में दर्द क्यों होते है??


सिद्ध आयुर्वेदिक

           शरीर में दर्द क्यों होते है??
    *वातदर्द रोगों की संपूर्ण जानकारी*
मात्र जानने से दर्दो से आप दर्दो से पाएंगे मुक्ति।



      *सिद्ध वातदर्द नाशक कल्पचुर्ण*
*सभी वातदर्द रोगों को जड़ से खत्म करता है*
*Online मंगवाए whats 94178 62263*
●●
वात क्या है ??

          वात, पित्त और कफ तीनों में से वात सबसे प्रमुख होता है क्योंकि पित्त और कफ भी वात के साथ सक्रिय होते हैं।

शरीर में वायु का प्रमुख स्थान पक्वाशय में होता है और वायु का शरीर में फैल जाना ही वात रोग कहलाता है।

हमारे शरीर में वात रोग 5 भागों में हो सकता है जो 5 नामों से जाना जाता है।

वात के पांच भाग निम्नलिखित हैं-
1.उदान वायु    - यह कण्ठ में होती है।
2.अपान वायु   - यह बड़ी आंत से मलाशय तक होती है।
3.प्राण वायु     -  यह हृदय या इससे ऊपरी भाग में होती है।
4.व्यान वायु        - यह पूरे शरीर में होती है।5.समान वायु       - यह आमाशय और बड़ी आंत में होती है।
वात रोग बहुत प्रकार की होती है।
●●●
जैसे
1.आमवात :-
आमवात के रोग में रोगी को बुखार होना शुरू हो जाता है तथा इसके साथ-साथ उसके जोड़ों में दर्द तथा सूजन भी हो जाती है।
इस रोग से पीड़ित रोगियों की हडि्डयों के जोड़ों में पानी भर जाता है। जब रोगी व्यक्ति सुबह के समय में उठता है तो उसके हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होती है और जोड़ों में तेज दर्द होने लगता है। जोड़ों के टेढ़े-मेढ़े होने से रोगी के शरीर के अंगों की आकृति बिगड़ जाती है।

●●●
2.सन्धिवात रोग
         जब आंतों में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है तो शरीर की हडि्डयों के जोड़ों में दर्द तथा अकड़न होने लगती है।

●●●
3.यूरिक एसिड वात रोग
गाउट रोग बहुत अधिक कष्टदायक होता है। यह रोग रक्त के यूरिक एसिड में वृद्धि होकर जोड़ों में जमा होने के कारण होता है। शरीर में यूरिया प्रोटीन से उत्पन्न होता है, लेकिन किसी कारण से जब यूरिया शरीर के अंदर जल नहीं पाता है तो वह जोड़ों में जमा होने लगता है और बाद में यह पथरी रोग का कारण बन जाता है।

●●●
मांसपेशियों में वातदर्द :-
         इस रोग के कारण रोगी की गर्दन, कमर, आंख के पास की मांस-पेशियां, हृदय, बगल तथा शरीर के अन्य भागों की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं जिसके कारण रोगी के शरीर के इन भागों में दर्द होने लगता है। जब इन भागों को दबाया जाता है तो इन भागों में तेज दर्द होने लगता है।

●●●
4.गठिया
        इस रोग के कारण हडि्डयों को जोड़ने वाली तथा जोड़ों को ढकने वाली लचीली हडि्डयां घिस जाती हैं तथा हडि्डयों के पास से ही एक नई हड्डी निकलनी शुरू हो जाती है। जांघों और घुटनों के जोड़ों पर इस रोग का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और जिसके कारण इन भागों में बहुत तेज दर्द होता है।

●●●
अब जाने
           *वात रोग के लक्षण*
वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में खुश्की तथा रूखापन होने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर की त्वचा का रंग मैला सा होने लगता है।

रोगी व्यक्ति को अपने शरीर में जकड़न तथा दर्द महसूस होता है।वात रोग से पीड़ित रोगी के सिर में भारीपन होने लगता है तथा उसके सिर में दर्द होने लगता है।

रोगी व्यक्ति का पेट फूलने लगता है तथा उसका पेट भारी-भारी सा लगने लगता है।रोगी व्यक्ति के शरीर में दर्द रहता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के जोड़ों में दर्द होने लगता है।रोगी व्यक्ति का मुंह सूखने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी को डकारें या हिचकी आने लगती है।
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अब जाने
वात रोग होने का कारण :-

वात रोग होने का सबसे प्रमुख कारण पक्वाशय, आमाशय तथा मलाशय में वायु का भर जाना है।
भोजन करने के बाद भोजन के ठीक तरह से न पचने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

जब अपच के कारण अजीर्ण रोग हो जाता है और अजीर्ण के कारण कब्ज होता है तथा इन सबके कारण गैस बनती है तो वात रोग पैदा हो जाता है।
पेट में गैस बनना वात रोग होने का कारण होता है।जिन व्यक्तियों को अधिक कब्ज की शिकायत होती है उन व्यक्तियों को वात रोग अधिक होता है।

जिन व्यक्तियों के खान-पान का तरीका गलत तथा सही समय पर नहीं होता है उन व्यक्तियों को वात रोग हो जाता है।

ठीक समय पर शौच तथा मूत्र त्याग न करने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

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अब जाने
वात रोग होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-
वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए।
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*क्या करे इस के लिए*
वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए।
इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए।
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इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए।

कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए।

पर यूरिक एसिड रोग  में इनका सेवन न करे।
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कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए।

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वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए।

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रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए।

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इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है।

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शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है।रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है।

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वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान कर इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा।

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*अगर आप वातरोग के आधीन आ गए हैं तो 2 से  5 महीने तक सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण जरूर इस्तेमाल करे।*
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*सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण online भी*
         *आप मगवा सकते हैं।*

*कैसे बनता है सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण*
नीचे लिंकः को टच करे।

सिद्ध इन्द्रयाण अजवाइन*

सिद्ध अयूर्वादिक

               *सिद्ध इन्द्रयाण अजवाइन*

समस्त दर्द, गठिया रोगों, कफ़ रोगों, स्तन रोगों,पेट के रोगों औऱ आंत के रोगो में सदियों से इन्द्रयाण अजवाइन को अमृत माना जाता रहा है।

           *कैसे तैयार होती हैं इन्द्रयाण अजवाइन*

        *इन्द्रयाण फ़ल में अजवाइन को डाल देते है।*
*5 किलो अजवाइन में 3 किलो इन्द्रयाण 500 ग्राम काला नमक,काली मिर्च  समेत  7 और अयूर्वादिक जड़ी बूटियों को मिलाकर कर 60 दिन के लिए रख देते हैं।*

5 किलो अजवाइन में 3 किलो इन्द्रयाण 500 ग्राम काला नमक,काली मिर्च
★भूमि आवला          50  ग्राम
★बाकुची                 20  ग्राम
★शुद्ध शिलाजी        10  ग्राम
★काली मिर्च            20  ग्राम
★सफ़ेद जीरा           50  ग्राम
★काला जीरा।          50  ग्राम
★कुडू                     50  ग्राम

*60 दिन में इन्द्रयाण अजवाइन तैयार  हो जाती हैं*

       *Online मंगवा सकते हैं इन्द्रयाण अजवाइन*

★★★

     *इन्द्रायण (गड्तुम्बा) के बारे संपूर्ण जानकरी*

इन्द्रायण की बेल समस्त भारत में पाई जाती है। इसकी लंबाई 20 से 30 फुट होती है। पत्ते असमान भागों में विभक्त तरबूज के पत्तों के समान 2-3 इंच लंबे और 2 इंच चौड़े होते हैं। पुष्प घंटाकार, पीले रंग के, पांच हिस्सों में बंटे होते हैं। फल गोल, मांसल, चिकने, 2-3 इंच व्यास के, कच्ची हालत में हरे और पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं। खरबूजे के समान इसके फल में 6 फांकें होती हैं। फलमज्जा कोमल स्पंज के समान, स्वाद में अत्यंत तिक्त होती है। बीज मज्जा में गढ़े रहते हैं। सामान्यतया छोटी और बड़ी, दो प्रकार की इन्द्रायण देखने को मिलती है, जिसमें 45-120 फल लगते हैं। उल्लेखनीय है कि बड़ी इन्द्रायण का फल पकने के बाद लाल रंग का हो जाता है।

विभिन्न भाषाओं में नाम

संस्कृत – इन्द्रवारुणी
हिंदी – इन्द्रायण
मराठी – इन्द्रफल
गुजराती – इन्द्रावणा
बंगाली – राखाल शसा
अंग्रेजी – कोलोसिन्थ (Colocynth) बिटर एपल (Bitter Apple)
लेटिन सिट्रयुलस कोलोसिन्थस   (Citrullus Colocynthis) |
इन्द्रायण के औषधीय गुण

आयुर्वेदिक मतानुसार इन्द्रायण रस में तिक्त, लघु, तीक्ष्ण, उष्ण प्रकृति, विपाक में कटु, कफ पित्तहर, सभी प्रकार के उदर रोग नाशक, पाचक, वात शामक, कब्ज़

दूर करने वाला, शोथहर, तीव्र गर्भाशय संकोचक, कामला, ज्वर, श्वास, खांसी, कृमि रोग, घाव, तिल्ली और ग्रंथि रोगों में लाभदायक है।

वैज्ञानिक मतानुसार इन्द्रायण की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके फलमज्जा में कोलोसिन्थिन नामक तिक्त पदार्थ और एक प्रकार का राल होने के कारण ही आतों में रेचन की क्रिया होती है और मलावरोध दूर होता है। इनके अलावा हेण्ट्रिएकोटेन, ए-इलेटरिन, फाइटोस्टेराल और वसा अम्ल होते हैं। बीजों में तिक्त स्थिर तेल इपुरैनाल (Ipuranol) 21 प्रतिशत, फाइटोस्टेराल,ग्लाइकोसाइनाइड, हाइड्रोकार्बन, टैनिन और सैपोनिन होते हैं। प्रत्येक फल में छिलका 23 प्रतिशत, बीज 62 प्रतिशत और मज्जा 15 प्रतिशत होते हैं।

इन्द्रायण के हानिकारक प्रभाव Side Effects of Indrayan

मरोड़ अधिक उत्पन्न करने के कारण इन्द्रायण का अकेले व्यवहार नहीं किया जाता। अधिक मात्रा में इसे सेवन करने से विष के लक्षण उत्पन्न होते हैं। अत: प्रयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए।

इन्द्रायण के सेवन की मात्रा

फलों का चूर्ण 125 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम तक। जड़ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम।

इन्द्रायण की उपलब्ध आयुर्वेदिक योग

इन्द्रायण वटी, इन्द्रायण तेल, इन्द्रायण अक।

इन्द्रायण का रोगों के इलाज में प्रयोग Indrayan Ke Fayde In Hindi

1. स्तन के रोग और इलाज : इन्द्रायण की जड़ को पानी में घिसकर बने लेप को स्तन पर लेप करने से उसकी सूजन, पीड़ा व घाव शीघ्र ठीक हो जाते हैं।

2. कान के रोगों का इलाज : इन्द्रायण के कच्चे या पके फल को कूटकर मसल लें और फिर 4 चम्मच तिल के तेल में मंद आंच पर पका लें। आधा तेल बचा रहने पर उसे छानकर शीशी में सुरक्षित रख लें। रोजाना सोने से पूर्व 2-3 बूंद डालने से बहरापन, कान में झनझनाहट, विभिन्न प्रकार की ध्वनियां सुनाई देना इत्यादि विकार ठीक हो जाते हैं।

3. शीघ्र प्रसव हेतु : इन्द्रायण की जड़ को प्रसूता के बालों में बांधने से शीघ्र प्रसव होता है। दूसरा प्रयोग इसकी जड़ के रस को रूई में भिगोकर योनि में रखने से भी यही लाभ मिलता है।

4. गर्भ धारण के लिए : बेल का फल इन्द्रायण की जड़ को बराबर की मात्रा में पीसकर पीने से स्त्री गर्भ धारण करने के योग्य बनती है | यह विशेषरूप से तब उपयोगी है जिस स्त्री को बच्चा न ठहर रहा हो |

5. ग्रन्थि शोथ : इन्द्रायण के पत्तो का लेप गाँठ पर बाँधने से वह बैठ जाती है|

6. प्रसूता का पेट बढ़ना : अनेक बार प्रसव होने से स्त्री का उदर क्षेत्र बेडौल होकर काफी बढ़ जाती है, ऐसे में इन्द्रायण के फल को पीसकर लेप तैयार करें और नियमित रूप से कुछ हफ्ते सोते समय पेट पर लगायें, पेट मूल अवस्था में आ जाएगा |

7. बवासीर के मस्सों पर : इन्द्रायण के बीजों को पानी में पीसकर लेप बनाए और उसे बवासीर के मस्सों पर दिन में 2 बार कुछ  हफ्ते तक लगाने से बवासीर में फायदा मिलता है |

8. गंजापन :  इन्द्रायण की जड़ को गोमूत्र में पीसकर नियमित रूप से गंजा वाले स्थानों पर लगाए | कुछ ही दिनों के प्रयोग से लाभ नजर आएगा |

9. कब्ज के इलाज में : इन्द्रायण के फल को घिसकर नाभि पर लगाए और इसकी जड़ का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सोते समय लें| इससे पुराने से पुराना कब्ज भी ठीक हो जाता है |

जानें कब्ज होने पर घरेलू उपचार (इलाज)

10. उदर कृमि के इलाज में : 10 ग्राम गुड में 2 ग्राम  इन्द्रायण की जड़ का चूर्ण मिलाकर सोते समय सेवन करने से 3-4 दिनों
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सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक
              ★ सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण★

         *पाचन तंत्र की मजबूती के लिएे*
पेनक्रियाज (अग्नाशय) पाचन तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो पेट के पीछे और छोटी आंत के पास में पाई जाती है।
 
पेनक्रियाज कमजोर होने पर सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण कारगर साबित होता है।
           *भूख न लगे तो यह चुर्ण रामबाण है*
             * पित्त वायु के लिए रामबाण*
             *अपेंडिक्स में रामबाण है*
*छाती और गले के छाल,मुंह छालेऔर जलन में फायदेमंद*
               *सिद्ध संतों की एक खोज*
*एक बार उपयोग करेगे तो बार बार मंगवागे*
             *सिद्ध पचन कल्पचुर्ण*
      *इंद्रायाण(कोड़तुम्बा) अजवाइन और*
         *गिलोय रस में तैयार होता है*
         *सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण चुर्ण*
        *पेट दर्द में कारगर है कल्पचुर्ण*
         *अपेंडिक्स में रामबाण है*
मानसिक तनाव, चिंता, भय, अवसाद, असंतुलित खान पान आदि आपके पाचन को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं|
गिलोय में digestive और stress दूर करने वाले गुण होते हैं जो की बदहजमी, कब्ज, गैस, मरोड़ आदि समस्याओं को दूर करता है और आपके पाचन को बेहतर बनाता है
      *यह गैस और कब्ज के लिये सर्वश्रेष्ठ दवा है।*
         *यह पेट के समस्त रोगों में लाभदायक है।*
   *सिद्ध  पाचन चूर्ण एक बेहतरीन दस्तावर औषधि है* |
    सभी रोग पेट के साफ न होने के कारण ही होते है
पेट साफ नही होगा बीमारी शरीर को जकड़ लेती हैं।
आयुर्वेद में कहा भी गया है कि स्वस्थ रहने का रास्ता पेट से होकर जाता है |
सिद्ध पाचक चूर्ण गैस्ट्रिक एवं कब्ज की समस्या में रामबाण औषधी साबित होती है |
आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में गैस्ट्रिक और कब्ज एक आम समस्या हो गई है जो हर घर में देखने को मिलती है |
सिद्ध पाचन चुर्ण आप को औऱ आपके  परिवार को रोग से मुक्ति दिलवा सकता है।
रोज या दूसरे दिन रात आधा चम्मच जरूर ले। आप कभी बीमार नही होंगे।
गैस बन गई हैं तो एक चुटकी मात्र चूसे 1 मिनट में जलन गैस समाप्त हो जाती है।
       सिद्ध पाचन चूर्ण बनाने की विधि
     सिद्ध  पाचन चूर्ण बनाने के लिए हमें –
त्रिफला                ~2 kg
बेल चुर्ण               ~ 1kg
ब्रह्मी बूटी              ~ 500 ग्राम
संखपुष्पी               ~200 ग्राम
हिंग                      ~  100 ग्राम
कालीमिर्च             ~  200 ग्राम
अजवायन             ~  400 ग्राम
दालचीनी             ~ 200 ग्राम
छोटी हरेड             ~  200 ग्राम
शुद्ध सज्जीखार     ~  100 ग्राम
सैंधा नमक            ~   50 ग्राम
नसादर                      100 ग्राम
काला नमक।                50 ग्राम
सौंफ भुनी             ~  100 ग्राम
पिपली छोटी              100 ग्राम
सोंठ                         100 ग्राम
पुदीना सत             ~    10ग्राम
निम्बू सत               ~   10 ग्राम 
मीठा सोडा             ~300 ग्राम
1लीटर गिलोय रस में भावना जरूर दे।
तभी यह पेट की हर इंफेसन को दूर करेगी।
अगर निम्बू औऱ पुदीना सत न मिले तो 20 ग्राम निम्बू रस में सभी चुर्ण को मिलाकर सायं में सुखाए।
इनको अच्छी तरह कूट – पीसकर और कपडछान कर के साफ़ एवं (Air Tight ) मजबूत डक्कन वाली शीशी में भर लेवे ,
  ★ यह गैस्ट्रिक और कब्ज की रामबाण औषधि है ★
मात्रा और सेवन विधि
पानी के साथ सेवन करे
सिद्ध पाचन चूर्ण को आधा चम्मच की मात्रा में रोज सुबह शाम सेवन करे |
बच्चों को कब्ज की या पेट दर्द की शकायत में चमच्च का 1/4 भाग गर्म पानी से दे।
1 से 6 महीने के बच्चों को एक चुटकी चटाएं।
लाभ
यह चूर्ण वायु तथा वात के सभी प्रकार के रोगों को दूर करता है |
इसके सेवन से पेट की अग्नि ठीक होती है |
अपान वायु बहार निकल जाती है ,
कब्ज को भी जड़ से दूर करने में सक्षम है |
यह चूर्ण बच्चो में भी लाभ कारी है |
★★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
आहार में रेशेदार फल और सब्जियाँ जैसे सेब, संतरे, ब्रोकोली, बेरियाँ, नाशपाती, मटर, अंजीर, गाजर और फलियाँ आदि शामिल करें।
साबुत अनाज जैसे भूरे चावल, ज्वार, बाजरा, मेवे, गिरियाँ, और मछली, दालें, मसूर दाल, चावल और सोया के उत्पादों का प्रयोग बढ़ाएँ।
पानी मिला फलों का रस, प्राकृतिक पदार्थों से उत्पन्न सब्जियाँ, और औषधीय चाय पियें।
बीज सहित अमरुद और बेल का फल आँतों को व्यवस्थित करता है, और आहार में रेशे की मात्रा बढ़ाता है, ताकि कब्ज से राहत मिल सके। फल जैसे कि केले, आलूबुखारे, अंगूर और पपीता भी इसमें सहायक होते हैं।
★★★
इनसे परहेज करे
अधिक शक्कर उत्सर्जित करने वाले आहार जैसे रिफाइंड अनाज, शक्कर की गोलियाँ, केक और बिस्कुट आदि से परहेज।
रेड मीट, डेरी आहार, और अंडे।
कॉफ़ी, चाय और शक्करयुक्त कार्बन वाले पेय।
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सिद्ध अयूर्वादिक
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मंदाग्नि के 103 रोग

              *मंदाग्नि के 103 रोग*
    मंदाग्नि से होते हैं 103 हानिकारक रोग


             *पेट के हाजमे की अग्नि जब मध्म
पड़ जाती है तो अनेकों रोगों का शरीर पर हमला होने लग जाता है।*


   *सिद्ध आयुर्वेदिक आप को कर रहा है जागृत*
           *मंदाग्नि को दरुस्त करता है*
              *सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण*

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        *सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण की*
    *जानकारी नीचे लिंकः में दी गई है*


       *मंदाग्नि रोगों की संपूर्ण जानकारी*

आयुर्वेद में बताया गया है कि मंदाग्नि (मन्द अगनी) से 103 प्रकार के रोग होते है, जिसमे पहले स्थान पर एसिडिटी और एक सौ तीन स्थान पर कैंसर को रखा गया है।

ये सूची यहाँ देने का प्रयास कर रही हूँ।
1. हाइपर एसिडिटी
2. जल्दी-जल्दी भूख लगना
3. भोजन के 4 घंटे बाद या खाली पेट जलन
4. अत्यधिक प्यास
5. हर समय मुँह सुखना
6. मसूढ़ो में संवेदनशीलता
7. लार का खट्टा होना
8. दाँतो में ढीलापन
9. होठो के किनारे फटना
10. दाँतो में ठंडा गर्म लगना
11. दाँतो का फटना या टुकड़ो में निकलना
12. दाँतो की नसों में दर्द
13. गले या टॉन्सिल का बार बार संक्रमण
14. अम्ल का मुँह में आना
15. अल्सर
16. खट्टी डकार
17. उदर के ऊपरी भाग में दर्द
18. बहुत ज्यादा गर्मी लगना या जलन होना
19. थकान, हाथ पैरो में भारीपन, मानसिक शक्ति का ह्रास
20. शरीर छूने से बुखार की अनुभूति
21. प्रसन्नता व उत्साह की कमी
22. अवसादित होने की प्रवृति
23. बिना कारण घबराहट, व्याकुलता, तेज शोरगुल में चिड़चिड़ाहट
24. अत्यधिक रक्तहीन चेहरा
25. सिरदर्द
26. आसानी से बातो बातो में आँसू आजाना
27. आँखों में सूजन, लाली, दर्द, जलन, गड़न
28. पलको एवं कोर्निया में प्रदाह
29. बालो का घुँघराले होना
30. नाख़ून पतले होना, जल्दी टूट जाना
31. रूखी त्वचा
32. बाल घुँघराले, बेजान, झड़ते
33. शरीर पर पसीने से खुजली
34. पित्ती उछलना
35. पिण्डलियों में बायटे आना, ऐंठन
36. झाईयां
37. कान में दर्द
38. आवाज़ में बदलाव
39. बैचैनी
40. कब्ज
41. ऑस्टियो ऑर्थोरिटिस
42. यूरिक एसिड बढ़ना
43. CRP बढ़ना
44. मासपेशियो में ऐंठन
45. पैर के बाहरी भाग में दर्द
46. अमाशय या अन्न नली में दर्द या घाव
47. बवासीर
48. भगन्दर
49. फिशर
50. गैस्ट्रिक

(वायु बनकर शरीर में घूमने से)

51. पेट में जलन
52. गले में जलन
53. छाती में जलन जैसे heart attack हो
54. सिर दर्द या भारीपन
55. चक्कर
56. कान में घंटियाँ बजना
57. हाई बी पी
58. सिर में भ्रम की स्थिति, समझ न आना
59. बालो का झड़ना
60. बालो का सफ़ेद होना या पकना
61. पीठ दर्द
62. धड़कन बढ़ना
63. पायरिया
64. मुँह में दुर्गन्ध
65. भूख न लगना
66. प्यास न लगना
67. खट्टी / कच्ची डकार
68. मितली होना
69. मल में गंध
70. पेट में भारीपन
71. अफारा
72. शुगर
73. ढीले मसूड़े
74. मसूढ़ो के किनारे सफ़ेद या हरी परत
75. मल थोड़ा पतला, लेकिन मुश्किल से निकले
76. उल्टी होने, करने के बाद हल्का महसूस होना
77. अनिद्रा
78. कोलेस्ट्रॉल बढ़ना
79. बॉडी का फूल जाना मोटा हो जाना
80. पैरो में चलने पर दर्द
81. मसूढ़ो से खून आना

(कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से होने वाले रोग)

82. रक्त वाहिनियों में अवरोध
83. हृदयाघात
84. रक्त वाहिनियों का का संकरा होना
85. धमनियों में थक्के जमना
86. अत्यधिक बलगम
87. साँस लेने में कठिनाई
88. सीने में भारीपन
89. धमनियों में कड़कपन
90. किडनी से जुडी हुई बीमारियाँ
91. मस्तिष्क में ब्लड सप्लाई अवरोध होने से भूलने की समस्या
92. शरीर में जगह जगह गाँठे
93. हर्निया
94. गर्भाशय का स्थान से नीचे लटक जाना
95. हाथ पैर पतले होना
96. आंतरिक या बाहरी रक्त स्त्राव
97. आँखों का कमजोर होना
98. आँखों के सामने कुछ उड़ता प्रतीत होना
99. मुँह में कफ़ ज्यादा आना
100. पसीने में बदबू
101. मल मूत्र ज्यादा होना, मल लेसदार होना
102. हाथ पैरो में फड़कन
103. शरीर में होने वाला कैंसर

*103 रोगों को सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण जड़ से करता है खत्म*

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Tuesday, 12 February 2019

सिद्ध आयुर्वेदिक शेंपू

सिद्ध आयुर्वेदिक शेंपू


*एलोवेरा आयुर्वेदिक शेंपू*


बालों का झड़ना, खुश्क बाल, दो मुँहे बाल,
बालों के विकास का रुकना, रूसी, त्वचा की इंफेक्शन, बालों की चमक मर जाना औऱ बालों की कमजोरी को करे जड़ से खत्म।
             *खुद घर बनाए*
              *लुटाई से बचे*
   *हम देगे जानकारी आप करे अविष्कार*

एलोवेरा व शहद दोनो ही बालों को नमी देते हैं। बालों से नमी निकालने के अलावा वे जड़ों से भी तेल हटाते हैं।
           *कैसे बनायें एलोवेरा शेंपू*
               *सामग्री देखे*

एलोवेरा रस  (जेल ) 100 ml
एक कोई भी शेंपू     20 ml
सेब का सिरका        50 ml
शहद                     50 ml
अरंडी तेल              50 ml
कोई भी खुसबू तेल   30 ml

विधि: 
एलोवीरा जेल और सामग्री को अच्छे से मिलाकर 2 से 4 बार लगा कर बालो को अच्छे से मलते रहे।

       *हफ्ते में 2 बार बालों को इस धोएं*
लाभः 

1.एलोवीरा एक तरह का कंडीशनर है. इसके इस्तेमाल से बाल रेशम से मुलायम बनते हैं और चमकीले नज़र आते हैं.

2. बाल झड़ेंगे नही न ही दो मुहे रहेंगे।

3.सिर की त्वचा की खुश्की, इंफेक्शन,रूसी और बालों की जड़ का दर्द में  हैरानीजनक लाभ होगा।

4. बाल लंबे और घने होने शुरू हो जाएंगे।

5.सिर में हल्कापन महसूस करेगे।
     *आयुर्वेदिक निशुल्क सलाह ले

     *Whats 94178 62263*